एयर इंडिया के विमान में महिला यात्री पर नशे में धुत शंकर मिश्रा नाम के एक यात्री द्वारा पेशाब किए जाने के मामले में क्रू और पायलट पर हुई कार्रवाई का जोरदार विरोध शुरू हो गया है।

पायलटों और पूर्व पायलटों के एक समूह ने विमान कंपनी पर अपनी कमियां छिपाने के लिए उन्हें बलि का बकरा बनाए जाने का आरोप लगाया है। इनका कहना है कि एयरलाइंस को पहले दिन से यदि घटना की जानकारी थी तो उन्होंने इस पर तभी कार्रवाई क्यों नहीं की। इनके मुताबिक जब मीडिया में नकारात्मक छवि बनी है तो विमान के पायलट और क्रू पर दोष मढ़ा जा रहा है, जबकि मैनेजमेंट पूरी घटना से वाकिफ था। क्रू और पायलट पर हुई कार्रवाई का विरोध

रिपोर्ट के मुताबिक एयर इंडिया के न्यूयॉर्क से नई दिल्ली आने वाली जिस प्लाइट में एक पैसेंजर ने बुजुर्ग महिला यात्री पर पेशाब कर दिया था, उसके कैप्टन और चार क्रू मेंबरों पर हुई कार्रवाई की मौजूदा और रिटायर्ड पायलटों ने जोरदार आलोचना की है। शनिवार को एयर इंडिया के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर कैंपबेल विलसन ने एक बयान जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि चार केबिन क्रू और एक पायलट को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है और जांच पूरी होने तक उन्हें डी-रोस्टर कर दिया गया है। मतलब, जांच पूरी तरह वह विमान नहीं उड़ा सकेंगे। हालांकि, अपने बयान में विलसन ने पांचों पर हुई कार्रवाई का कारण नहीं दिया था।

उनके बयान से पता चलता है कि एयरलाइंस को 26 नवंबर को हुई घटना के एक दिन बाद ही इसके बारे में जानकारी थी। क्योंकि, उन्होंने बयान में लिखा, '27 नवंबर को शिकायत मिलने के बाद एयर इंडिया ने पावती स्वीकार की और 30 नवंबर को प्रभावित पैसेंजर के परिवार के साथ पत्राचार शुरू कर दिया।' उन्होंने यह खुलासा नहीं किया कि शिकायत क्रू और कैप्टन की ओर से प्राप्त हुई या किसी और के द्वारा। वैसे एयर इंडिया सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की है कि जब फ्लाइट नंबर AI102 दिल्ली में उतरा तो केबिन क्रू इंचार्ज ने जो कुछ हुआ था, उसकी एक विस्तृत रिपोर्ट लिखी और उसपर कैप्टन ने काउंटर-साइन किया था।

पुराने इंडियन एयरलाइंस के पूर्व पायलट और फ्लाइट सेफ्टी एंड ट्रेनिंग के पूर्व डायरेक्टर कैप्टन एसएस पानेसर ने कहा है, 'निर्धारित प्रक्रिया के तहत, हर फ्लाइट के बाद फ्लाइट के दौरान जो कुछ भी हुआ, केबिन क्रू इंचार्ज उसपर एक रिपोर्ट भरता है। कैप्टन इसे पढ़ता है और उसपर काउंटर-साइन करता है।' पानेसर ने सवाल उठाया है कि 'अगर केबिन-क्रू डिपार्टमेंट और एयर इंडिया ने नहीं पढ़ा या रिपोर्ट पर तत्काल कार्रवाई नहीं की, तो अब कैप्टन पर आरोप कैसे लगा सकते हैं? कैप्टन को डी-रोस्टर करना और कारण बताओ नोटिस थमाना पूर्व तरह से अनुचित और हास्यास्पद है।'

उनका सीधा आरोप है कि अपनी शर्मिंदगी मिटाने और गलती छिपाने के लिए एयर इंडिया क्रू के सदस्यों और कैप्टन को बलि का बकरा बना रहा है। उनके मुताबिक, 'डायरेक्टर इन फ्लाइट सर्विसेज और संगठन के अन्य बड़े अधिकारी जो रिपोर्ट पर बैठे रहे या आरोपी और पीड़ित के बीच डील कराने की कोशिश की, असल में उन्हें सजा मिलनी चाहिए।' क्रू और कैप्टन के समर्थन में उतरने वाले पायलट समुदाय का कहना है कि अगर उनके खिलाफ किसी कार्यवाई की आवश्यकता थी, तो यह 27 नवंबर को होती या फिर घटना के तुरंत बाद। इनका साफ आरोप है कि क्रू को डी-रोस्टर करना निश्चित तौर पर दोषी को बचाने का प्रयास है।

एयर फोर्स के दिग्गज कैप्टन अजय अहलावत ने कहा, 'लैंडिंग के बाद क्रू ने लिखित रिपोर्ट के माध्यम से मैनेजमेंट को घटना की जानकारी दी। अगर रिपोर्ट स्पष्ट नहीं थी तो मैनेजमेंट और ज्यादा जानकारी मांग सकता था। जबकि, एयरलाइन ने तो संबंधित पैसेंजर से बातचीत करके मामले को दबाने की कोशिश की।' एक नॉन-शेड्यूल ऑपरेटर के साथ मौजूदा समय में चीफ फ्लाइट सेफ्टी के तौर पर जुड़े कैप्टन अहलावत का कहना है, 'जब मामला मीडिया में उछला और लगा कि यह नकारात्मक जा रहा है, तो एयरलाइन ने अब खुद गलती कबूल करने के बजाय क्रू पर दोष मढ़ने की कोशिश की है। यह एक पेंडुलम की तरह है, जो इनैक्शन से ओवररिएक्शन में तब्दील हो जाता है। आरोपी यात्री की हरकत शर्मनाक और घिनौनी थी, वह कड़ी सजा का पात्र है। लेकिन, कार्रवाई नहीं होने के लिए एयरलाइन का पायलटों को दोष देना, प्रोफेशनल लिंचिंग है।'