देश के सबसे बड़े अस्पताल एम्स में आप इलाज कराते हैं और आपके पास कैश खत्म हो जाए तो आपको टेंशन लेने की जरूरत नहीं है. क्योंकि अब एम्स अस्पताल में सारे पेमेंट डिजिटल होने जा रहे हैं.

एक अप्रैल से यहां पर सभी लोगों को पेमेंट करने के लिए डिजिटल मोड का इस्तेमाल कर सकेंगे. एम्स दिल्ली में 1 अप्रैल 2023 से सभी भुगतान पूरी तरह से डिजिटल हो जाएंगे. इसके लिए एम्स प्रशासन यूपीआई के अलावा स्मार्ट कार्ड और काउंटरों पर कार्ड से भुगतान शुरू करने जा रही है. साथ ही एम्स ने नए और पुराने मामलों के ओपीडी रजिस्ट्रेशन के लिए आयुष्मान भारत स्वास्थ्य एकाउंट आईडी के उपयोग को बढ़ावा देने का फैसला लिया है.

बता दें कि एम्स में एक अप्रैल, 2023 से डिजिटल Payment की सुविधा मिलने लगेगी. यूपीआई (एकीकृत भुगतान इंटरफेस) और कार्ड दोनों की सुविधा मिलेगी. एम्स स्मार्ट कार्ड जारी करेगा जो वहां पर सभी काउंटर पर मौजूद रहेंगे. इसके लिए संस्थान द्वारा आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट आईडी का इस्तेमाल कर ओपीडी रजिस्ट्रेशन किया जा सकेगा, इसे नए और पुराने मरीज दोनों इस्तेमाल कर सकेंगे.

15 नवंबर को जारी एक कार्यालय ज्ञापन के अनुसार, यह एम्स-नई दिल्ली में सभी ओपीडी में राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) के ‘स्कैन एंड शेयर क्यूआर कोड’ से जल्दी और आराम से रजिस्ट्रेशन होगा ताकि लोगों को बेहतर सुविधा मिले. बता दें कि इसके लिए सभी कियोस्क और काउंटर सुबह 7 बजे से रात 10 बजे तक काम करेंगे. बिना स्मार्टफोन की मदद से मरीजों के आभा आईडी को बनाया जाएगा.

21 नवंबर से शुरू होगा पायलट प्रोजेक्ट

21 नवंबर से इस प्रोजेक्ट को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर ओपीडी में इस्तेमाल किया जाएगा और एक जनवरी से सभी ओपीडी में इसे शुरू किया जाएगा. अभी यह देखने में आता है कि जो भी मरीज एम्स ओपीडी में दिखाने आते हैं उन्हें लंबी कतार में खड़े रहना पड़ता है, जहां मैनुअल तरीके से डाटा को दर्ज किया जाता है ताकि रजिस्ट्रेशन हो सके.

रजिस्ट्रेशन में लगेगा कम समय

ज्ञापन में कगहा गया है कि आभा आईडी के रजिस्ट्रेशन के वक्त ओटीपी में देर हो जाती है. ओटीपी को भेजने की अधिकतम सीमा तीन बार ही है. स्कैन और शेयर क्यूआर कोड से मरीजों को रजिस्ट्रेशन के वक्त कम समय में काम हो जाएगा. इससे उन्हें सुविधा के साथ समय की बचत होगी.