प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई पर शाओमी प्रवक्ता ने दावा किया, हमारे सभी संचालन भारतीय कानूनों और विनियमों का दृढ़ता से अनुपालन करता है

प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई पर शाओमी प्रवक्ता ने दावा किया, हमारे सभी संचालन भारतीय कानूनों और विनियमों का दृढ़ता से अनुपालन करता है

स्मार्टफोन निर्माता चीनी कंपनी Xiaomi की भारतीय यूनिट के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय अपना शिकंजा कसता जा रहा है। इसी क्रम में शनिवार को ईडी ने बैंक खातों में जमा शाओमी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के 5551.27 करोड़ रुपये जब्त कर लिए। इस संबंध में ईडी की तरफ से एक बयान भी जारी किया गया था।

जिसमें कहा गया था कि ईडी ने कंपनी द्वारा किए गए गोरखधंधे में विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 के तहत इस कार्रवाई को अंजाम दिया है। अब इस मामले में चीनी कंपनी का भी बयान आया है।

चीनी स्मार्टफोन कंपनी शाओमी के प्रवक्ता का कहना है कि कंपनी एक प्रतिबद्ध ब्रांड के रूप में भारत के लिए पूरी तरह से समर्पित है। उन्होंने यह भी दावा किया, 'हमारे सभी संचालन भारतीय कानूनों और विनियमों का दृढ़ता से अनुपालन करते हैं।'

शाओमी के प्रवक्ता ने आगे कहा कि हमने सरकारी अधिकारियों के आदेश का ध्यानपूर्वक अध्ययन किया है। हम मानते हैं कि हमारे रॉयल्टी भुगतान और बैंक को दिए गए विवरण सभी वैध और सत्य हैं। शाओमी इंडिया द्वारा किए गए ये रॉयल्टी भुगतान इन-लाइसेंस प्राप्त तकनीकों और हमारे भारतीय संस्करण उत्पादों में उपयोग किए जाने वाले आईपी के लिए थे। शाओमी इंडिया के लिए इस तरह के रॉयल्टी भुगतान करना एक वैध वाणिज्यिक व्यवस्था है। हालांकि, हम किसी भी गलतफहमी को दूर करने के लिए सरकारी अधिकारियों के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
गौरतलब है कि कंपनी भारत में एमआई और रेडमी ब्रांड नाम के तहत मोबाइल फोन का कारोबार करती है। ईडी ने शनिवार को की गई कार्रवाई के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि शाओमी इंडिया चीन स्थित शाओमी ग्रुप की पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी है। एजेंसी ने कहा कि फरवरी 2022 में चीनी फर्म द्वारा विदेश भेजे गए कथित अवैध प्रेषण के संबंध में कंपनी के खिलाफ जांच शुरू की गई थी। इसके बाद विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) की संबंधित धाराओं के तहत खातों में जमा राशि की जब्ती की गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, Xiaomi इंडिया ने वर्ष 2014 में देश में अपना परिचालन शुरू किया था और वर्ष 2015 से बाहर पैसे भेजना शुरू कर दिया था। कंपनी ने तीन फॉरेन बेस्ड कंपनियों को रॉयल्टी की आड़ में 5551.27 करोड़ रुपये के बराबर विदेशी मुद्रा का प्रेषण किया। इन कंपनियों में शाओमी समूह की एक एंटिटी का नाम भी शामिल है। रॉयल्टी के नाम पर ये भारी-भरकम राशि शाओमी ग्रुप की एंटिटीज के निर्देश पर भेजी गई थी, जबकि अन्य दो कंपनियां अमेरिकी थीं।

ईडी ने अपने बयान में कहा कि शाओमी इंडिया मोबाइल फोन के निर्माण से लेकर उसके वितरण तक की जिम्मेदारी संभालती रही, जबकि उसने इन तीनों विदेशी कंपनियों से कभी कोई सेवा नहीं ली। लेकिन, इन कंपनियों को पैसे जरूर भेजे जाते रहे। कंपनी ने रॉयल्टी के नाम पर विदेश में इतनी बड़ी राशि भेजी, जो फेमा की धारा 4 का सीधा उल्लंघन है। 

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