पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या में दोषी ठहराए गए सभी छह लोगों के खिलाफ बड़ा एक्शन लिया है। कोर्ट के रिहा करने का आदेश देने के एक हफ्ते बाद केंद्र सरकार ने गुरुवार को कोर्ट से अपने फैसले की समीक्षा करने की अपील की है।

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि वह 6 दोषियों को रिहा करने के अपने आदेश पर पुनर्विचार करे।

कोर्ट ने इस वजह से किया सभी लोगों को रिहा

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने यह भी कहा कि 6 दोषियों में से चार श्रीलंकाई थे और उन्हें देश के पूर्व प्रधानमंत्री की हत्या के जघन्य अपराध के लिए आतंकवादी होने का दोषी ठहराया गया था। इससे पहले, कोर्ट ने आरोपी को रिहा करते हुए कहा था कि फैसला कैदियों के अच्छे व्यवहार और मामले में दोषी ठहराए गए एक अन्य शख्स एजी पेरारिवलन की मई में रिहाई पर आधारित था। जिसमें कहा गया था कि गिरफ्तारी के वक्त उसकी उम्र 19 साल थी और वह 30 साल से ज्यादा समय से जेल में था।

ऐसे हुई थी 1991 में पूर्व पीएम राजीव गांधी की हत्या

कांग्रेस ने इस फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि पूर्व पीएम राजीव गांधी के हत्यारों को रिहा करने का सुप्रीम कोर्ट का फैसला पूरी तरह से अस्वीकार्य और पूरी तरह से गलत है। 21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरंबुदुर में राजीव गांधी की हत्या कर दी गई थी। इस हमले को एलटीटीई संगठन ने अंजाम दिया था। श्रीपेरंबुदुर में कांग्रेस पार्टी की ओर से चुनाव प्रचार के दौरान एक आत्मघाती हमलावर ने राजीव गांधी की हत्या कर दी थी। इस मामले में सात लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।