भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चल रहे तनाव के समाधान के लिए सैन्य कमांडरों की 16वें दौर की वार्ता 17 जुलाई को होगी। भारत इस वार्ता के दौरान चीनी वायुसेना के लड़ाकू विमान के भारतीय सीमा में घुसपैठ के प्रयास का मुद्दा भी उठाएगा। जून के आखिरी सप्ताह में एक चीनी जे-10 लड़ाकू विमान सीमा पर तैनात भारतीय सैनिकों की चौकियों के बेहद करीब आ गया गया था। सीमा पर तैनात भारतीय रडार की पकड़ मे आने के बाद भारतीय वायु सेना भी अलर्ट हो गई थी और किसी भी अनचाही स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हो गई थी।

17 जुलाई को भारतीय सीमा के चुशूल-मोल्डो इलाके में होने वाली सैन्य कमांडरों की वार्ता में भारतीय पक्ष जोर-शोर से इस मुद्दे को उठाएगा कि चीनी वायुसेना को वास्तविक नियंत्रण रेखा पर बने 10 किलोमीटर के नो-फ्लाई जोन का सम्मान करना चाहिए। भारत और चीन के जवान जून 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद से ही सीमा पर एक दूसरे के आमने सामने हैं। भारतीय पक्ष डेपसांग और डेमचोक में में सामा विवाद का समाधान और बाकी स्थानों से सैनिकों की वापसी के लिए चीन पर लगातार दबाव बना रहा है।

हाल ही में भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर की बाली में चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात हुई थी। इस मुलाकात में एलएसी पर जारी तानाव का मुद्दा प्रमुखता से उठा था। दोनो देशों के विदेश मंत्रियों की मुलाकात जी-20 देशों के सम्मेलन के दौरान हुई थी। इस दौरान जयशंकर और वांग यी ने एक घंटे अलग से बैठक की थी और सीमा पर जारी गतिरोध के समाधान की जरूरत पर चर्चा की थी। बता दें कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारत और चीन के 50 सा 60 हजार सैनिक भारी हथियारों के साथ एक दूसरे के आमने सामने हैं।