नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी ने सुकेश के आरोपों के बाद दिल्ली के मुख्मयंत्री अरविंद केजरीवाल का लाई डिटेक्टर टेस्ट करवाने की मांग कर दी है। एक संवाददाता सम्मेलन में भारतीय जनता पार्टी के सांसद मनोज तिवारी ने मंगलवार को मांग की है कि दिल्ली के कथित शराब घोटाले में अरविंद केजरीवाल का लाई डिटेक्टर टेस्ट होना चाहिए।

मनोज तिवारी ने सवाल किया कि क्या अरविंद केजरीवाल इतनी बड़ी आरोपों पर चुप्पी साधे रखेंगे? जेल में बैठा व्यक्ति एक और चिट्ठी लिख रहा है कि उसे धमकियां मिल रही हैं। ऐसी स्थिति में भारतीय जनता पार्टी चाहती है कि इस मामले के तीनों आरोपियों का लाई डिटेक्टर टेस्ट हो। इसके अलावा मनोज तिवारी ने यह भी मांग की है कि सत्येंद्र जैन को जल्दी से जल्दी से किसी न्यूट्रल जेल में डाला जाए ताकि वो सबूतों को बाधित ना कर सकें।

नमो साइबर योद्धाओं ने दिल्ली में आम आदमी पार्टी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया और सत्येंद्र जैन और कैलाश गहलोत का लाई डिटेक्टर टेस्ट करवाने की मांग की है। केजरीवाल सरकार के जेल मंत्री इस वक्त मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक केस में दिल्ली के तिहाड़ जेल में बंद हैं। ठग सुकेश चंद्रशेखर ने आरोप लगाया है कि सत्येंद्र जैन ने तिहाड़ जेल में प्रोटेक्शन मनी के तौर पर उससे 10 करोड़ रुपये की वसूली की है। ठग का यह भी आरोप है कि उसने राज्यसभा सीट के लिए आम आदमी पार्टी को 50 करोड़ रुपये दिये हैं।

बता दें कि अपने लेटर में सुकेश ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और दिल्ली सरकार के मंत्री सत्येंद्र जैन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सुकेश ने लिखा है कि गोवा और पंजाब चुनावों के लिए आम आदमी पार्टी ने मुझसे पैसे मांगे थे और मैंने उन्हें पैसे दिए भी थे। सुकेश ने इस लेटर में आम आदमी पार्टी पर सवाल उठते हुए केजरीवाल का इस्तीफा मांगा है। महाठग ने अपने पत्र में आगे लिखा है कि अगर मैं झूठा हूं तो केजरीवाल और सत्येंद्र जैन मुझ पर केस वापस लेने का दबाव क्यों बना रहे हैं।

ठग सुकेश चंद्रशेखर ने एक के बाद चिट्ठियां लिखकर दिल्ली की आम आदमी पार्टी के नेताओं की मुश्किलें लगातार बढ़ाई हैं। सुकेश ने 3 पन्नों की अपनी नई चिट्ठी में कुल सात पॉइंट्स में कहा कि केजरीवाल और उनके साथी कह रहे हैं मैं जानबूझकर चुनाव के समय यह सब कर रहा हूं, और ऐसा तब क्यों नहीं किया जब ईडी और सीबीआई मुझसे सवाल पूछ रहे थे। सुकेश ने खुद ही इसका जवाब देते हुए कहा कि पहले मैं चुप रहा और सब कुछ इग्नोर किया, लेकिन जेल प्रशासन के द्वारा लगातार मिल रही धमकियों और दबाव को झेलना मुश्किल हो गया।