पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी साल 1991 के मिड टर्म चुनाव जीत एक बार फिर से सरकार में आने के लिए बहुत उत्साहित थे. अपनी जीत पक्की करने के लिए वो रैलियों और दौरों पर थे. जिस तरह का माहौल था, उससे ये तय माना जा रहा था कि राजीव ही प्रधानमंत्री बनेंगे.

शाम करीब 6 बजे राजीव ने आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में चुनावी मीटिंग खत्म की और आगे की यात्रा के लिए तमिलनाडु जाने की योजना बनाई. उनका विमान तब के मद्रास और आज के चेन्नई जाने के लिए तैयार था. यहां कांग्रेस के कई दिग्गज राजीव के स्वागत के लिए खड़े थे.

तभी अचानक राजीव गांधी के पायलट ने उन्हें बताया कि विमान में कुछ तकनीकी गड़बड़ी है और चेन्नई जाना संभव नहीं है. हताशा भरे कदमों से राजीव स्टेट गेस्ट हाउस की तरफ निकल गए. जब राजीव रास्ते में थे तो पुलिस को वायरलेस पर मैसेज आया कि विमान ठीक हो गया है. ये सुनकर राजीव का काफिला एयरपोर्ट की तरफ मुड़ गया. बाद में राजीव के पायलट ने ये बताया था कि विमान के कम्युनिकेशन सिस्टम में जो तकलीफ थी वो ठीक कर दी गई थी.

राजीव गांधी इतनी जल्दी में थे कि उन्होंने अपने पर्सनल सिक्योरिटी चीफ ओपी सागर को तक चेन्नई जाने की बात नहीं बताई. ओपी सागर उन्ही के काफिले में थे, लेकिन दूसरी गाड़ी में. राजीव गांधी बिना पर्सनल सिक्योरिटी टीम के ही मद्रास रवाना हो गए. रात साढ़े आठ बजे के करीब कांग्रेस के नेताओं ने मद्रास एयरपोर्ट पर राजीव गांधी का स्वागत किया. उसी रात राजीव गांधी को श्रीपेरंबदुर में एक रैली को संबोधित करना था. रैली के लिए पहले से ही उन्हें देरी हो रही थी.

राजीव गांधी के आखिरी शब्द ‘Don’t Worry’

21 मई 1991 को रात लगभग सवा दस बजे राजीव गांधी श्रीपेरंबदुर पहुंचे. भारी संख्या में लोग उनका इंतजार कर रहे थे. उनके और उनकी मां इंदिरा गांधी के सम्मान में मंच से गाने बज रहे थे. पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग गैलरी बनाई गई थीं. राजीव पहले पुरुषों की गैलरी में गए फिर बाद में उस गैलरी में, जहां महिलाएं उनका नाम पुकार रही थीं. उन्हीं में से एक 30 साल की युवा लड़की भी थी, जो किसी अलग मकसद से राजीव की ओर बढ़ रही थी. एक महिला कॉन्स्टेबल ने उस लड़की को रोकने की कोशिश की, लेकिन राजीव गांधी के दखल के बाद उसने लड़की को आगे आने दिया. अनुसुइया नाम की उस कॉन्स्टेबल से राजीव गांधी ने कहा था, चिंता मत करो… ये उनके आखिरी शब्द थे. चंद सेकंड बाद उनकी हत्या हो गई.

इतना जल गया था शव की पहचानना था मुश्किल

LTTE की आत्मघाती हमलावर धानू ने राजीव गांध के पैर छूने की कोशिश के दौरान उस बम के बटन को दबा दिया, जिसके विस्फोट ने पूर्व प्रधानमंत्री की हत्या कर दी. जांच डायरी के मुताबिक उस समय घड़ी में 10:21 बज रहे थे. चारों तरफ इंसानी मांस के चीथड़े बिखरे हुए थे. राजीव गांधी के शव को पहचानना नामुमकिन था. उनकी पहचान लोटो ब्रांड के जूतों से हुई थी, जो उन्होंने पहने हुए थे. उनका शव, उनके बॉडी गार्ड प्रदीप गुप्ता के शव के पास पड़ा था.

जेटली ने सदन में दिया था आजाद को जवाब

राजीव गांधी सफेद रंग के लोटो के स्पोर्ट्स शूज पहनते थे. उस विस्फोट में राजीव गांधी का शरीर इतना बुरी तरह से जल गया था कि उनके सफेद जूतों से ही उनकी पहचान की गई. 2015 में कांग्रेस पार्टी ने सरकार पर आरोप लगाया था कि वो उनके नेता राहुल गांधी की जासूसी कर रही है. ये आरोप लगाते हुए तब कांग्रेस पार्टी के नेता गुलाम नबी आजाद ने सवाल किया था कि आखिर पुलिस को राहुल गांधी के जूतों के साइज की क्या जरूरत है. इन आरोपों पर पलटवार करते हुए तब के वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सदन में कहा था कि जब पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या की गई थी, तब उनके शव की पहचान उनके Lotto के जूतों से हुई थी, जो उन्होंने उस समय पहने हुए थे.