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‘खटारा बस परियोजना’ से ‘खटारा युवा नीति’ तक पहुंची भाजपा सरकार : जीतू पटवारी

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 ‘खटारा बस परियोजना’ से ‘खटारा युवा नीति’ तक पहुंची भाजपा सरकार : जीतू पटवारी
ऐ एल  द्विवेदी 

भोपाल: मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने, रोजगार के नाम पर लगातार घोषणाएं करने, भर्ती परीक्षाओं में देरी और पेपर लीक की घटनाओं पर प्रभावी कार्रवाई नहीं करने तथा प्रदेश पर लगातार बढ़ता कर्ज डालने का गंभीर आरोप लगाया है।

पटवारी ने कहा कि इंदौर से उज्जैन जाते समय ‘मुख्यमंत्री सुगम बस सेवा’ की चलती बस में आग लगने की घटना ने सरकार की योजनाओं की जमीनी हकीकत सामने ला दी है। जिस योजना को सरकार अपनी उपलब्धि बता रही थी, उसकी हालत ऐसी है कि चलती बस में आग लग रही है। अब प्रदेश में ‘खटारा बस परियोजना’ के बाद ‘खटारा युवा नीति’ और ‘खटारा सरकार’ की पहचान बन गई है। जब भी ‘खटारा सरकार’ की बात हो, तो जनता के सामने उस जलती हुई बस का दृश्य आना चाहिए।

पटवारी ने कहा कि सरकार ने अगले वर्ष को ‘युवा वर्ष’ मनाने की घोषणा की है और भारी बजट के साथ यूथ कॉन्क्लेव आयोजित किया गया। सांस्कृतिक कार्यक्रम में बॉलीवुड गायक जुबिन नौटियाल को 17 लाख रुपये देकर बुलाया गया, लेकिन कार्यक्रम में युवाओं के लिए व्यवस्थाएं तक ठीक नहीं थीं।

उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के दौरान पुलिस अधिकारियों द्वारा वहां पहुंचे युवाओं और बेटियों के साथ जिस तरह की बदसलूकी की गई, वह बेहद शर्मनाक है। युवाओं के बाल खींचकर उन्हें बाहर निकाला गया और इसकी तस्वीरें समाचार पत्रों के मुख्य पृष्ठ तक पहुंचीं। ऐसी कार्रवाई के लिए जिम्मेदार पुलिस अधिकारी को तत्काल निलंबित किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री स्वयं प्रदेश के गृह मंत्री भी हैं, इसलिए उन्हें इस मामले में जवाब देना चाहिए।

पटवारी ने कहा कि मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग में लगभग 1,500 से 1,600 पद खाली पड़े हैं, लेकिन सरकार 100, 150 या पौने 200 पदों पर भर्ती निकालकर अपनी पीठ थपथपाती है। मुख्यमंत्री ने वर्ष में दो बार PSC परीक्षा कराने की घोषणा की है, लेकिन सवाल यह है कि जब पद ही पर्याप्त संख्या में सृजित नहीं होंगे तो साल में दो बार परीक्षा कराने का औचित्य क्या है?

उन्होंने कहा कि पूर्व में PSC परीक्षाओं के परिणाम आने में तीन-तीन साल तक लगते रहे हैं। युवाओं का भविष्य वर्षों तक परीक्षा, परिणाम और नियुक्ति के बीच अटका रहा।

पटवारी ने कहा कि भाजपा सरकार अब आगामी वर्ष में एक लाख सरकारी नौकरियां देने की बात कर रही है। लेकिन यही सरकार पहले 2.5 लाख और 5 लाख नौकरियां देने के दावे कर चुकी है। सरकार बताए कि पहले की घोषणाओं का क्या हुआ?

उन्होंने कहा कि प्रदेश में स्वीकृत पदों के आधार पर लगभग 13 से 14 लाख पद होने चाहिए, लेकिन वर्तमान में केवल लगभग 7.4 लाख पद भरे हुए हैं और 5 लाख से अधिक सरकारी पद खाली पड़े हैं। पिछले 20 वर्षों में केवल 59 हजार पद भरे गए हैं।

पटवारी ने कहा कि सरकारी रोजगार/प्लेसमेंट पोर्टल पर ही 25 लाख से अधिक बेरोजगार युवाओं का डेटा दर्ज है, जबकि वास्तविक बेरोजगार युवाओं की संख्या करीब 70 लाख तक बताई जाती है। ऐसे में केवल एक लाख नौकरियों की घोषणा युवाओं के साथ मजाक है।

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि प्रदेश के स्कूलों में शिक्षकों के करीब 3 लाख पद खाली हैं। शिक्षक लगातार आंदोलन कर रहे हैं। वर्ग-1 और वर्ग-2 की परीक्षाएं पास कर चुकी बेटियों की नियुक्तियां वर्षों से लंबित हैं।

उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा की स्थिति भी चिंताजनक है। प्रदेश की 17 सरकारी विश्वविद्यालयों में प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर के 86 से 87 प्रतिशत तक पद रिक्त हैं। सरकार युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और रोजगार देने की बात करती है, लेकिन जिन संस्थानों में उन्हें शिक्षा मिलनी है, वहां शिक्षक ही नहीं हैं।

पटवारी ने कहा कि प्रदेश सरकार का कुल कर्ज बढ़कर लगभग 5.68 लाख करोड़ रुपये से 6.35 लाख करोड़ रुपये के स्तर तक पहुंच गया है। इसी महीने भी सरकार करीब 6 हजार करोड़ रुपये का नया कर्ज ले रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि बजट का बड़ा हिस्सा कर्ज की देनदारियों और ब्याज चुकाने में जा रहा है। सरकार बाजार से 7 से 8 प्रतिशत तक की ऊंची ब्याज दरों पर कर्ज ले रही है। कर्ज लेने की प्रक्रिया से लेकर उस राशि से बनने वाली योजनाओं तक में भारी कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं।

मध्य प्रदेश भर्ती परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक के मामलों के लिए बदनाम हो चुका है। जिस प्रदेश में व्यापमं घोटाले ने देशभर में सवाल खड़े किए, वहां आज भी भर्ती परीक्षाओं को लेकर युवाओं में भरोसे का संकट बना हुआ है।

व्यापमं घोटाले में सजा पाने वाले अथवा जिनकी भूमिका पर सवाल उठे, ऐसे लोगों का प्रभाव आज भी सत्ता के गलियारों में दिखाई देता है और वे सरकार के महत्वपूर्ण सलाहकारों के रूप में बैठे हैं।

स्वामित्व योजना का विरोध कर रहे और आंदोलनरत पटवारियों पर देवास, भोपाल, इंदौर सहित विभिन्न स्थानों पर निलंबन की कार्रवाई कर उन्हें डराने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार के खिलाफ निष्पक्ष खबरें प्रकाशित करने और राहुल गांधी जी के प्रदर्शन को मुख्य पृष्ठ पर स्थान देने वाले प्रतिष्ठित समाचार पत्रों पर सरकारी विज्ञापन और बकाया भुगतान रोकने का दबाव बनाया जा रहा है। लोकतंत्र में मीडिया की स्वतंत्रता को दबाने का कोई भी प्रयास स्वीकार नहीं किया जाएगा।

सरकार के करीब 80 प्रतिशत मंत्री मुख्यमंत्री की कार्यशैली से असंतुष्ट हैं और उनकी बात नहीं सुन रहे हैं। नगरीय प्रशासन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, आदिवासी मामले, लोक निर्माण विभाग और स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विभागों में भी सरकार के निर्देशों की अनदेखी की स्थिति सामने आ रही है।

उन्होंने कहा कि जब सरकार के मंत्री ही मुख्यमंत्री की बात नहीं सुन रहे हैं, तो यह सरकार प्रदेश कैसे चला रही है, इसका जवाब मुख्यमंत्री को जनता को देना चाहिए।