यूपी में पराली जालने वाले किसान अब ‘प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि’ योजना का फायदा नहीं उठा पाएंगे. कृषि विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि प्रदेश के अंदर जो किसान पराली जलाते हुए पकड़े जाएंगे उनको किसान सम्मान निधि का लाभ नहीं दिया जाएगा.

इसी बीच खबर है कि देवरिया जिले में पराली जालने वाले 9 किसानों के खिलाफ कृषि विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है. विभाग ने उन किसानों को नोटिस जारी किया है.

कृषि विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव देवेश चतुर्वेदी ने पूरे घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए कहा कि पराली जालने की घटना में कमी लाने के लिए यह कदम उठाया गया है. उन्होंने मंगलवार को कहा कि यह उन किसानों के लिए सिर्फ एक चेतावनी है, जो राज्य सरकार के निर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं. वहीं, विशेषज्ञों का कहना है कि पीएमकेएसएन के तहत अनुदान रोकने की धमकी योजना के तहत पंजीकृत लगभग 2.83 करोड़ किसानों को डराने के लिए बाध्य करना है. हालांकि, राज्य सरकार को किसानों को केंद्रीय अनुदान रोकने की अनुमति देने का कोई प्रावधान नहीं है. अधिकारियों ने कहा कि यह उपाय प्रतिष्ठित केंद्रीय योजना के प्रति किसानों को सावधान करेगा.

अभी भी सुधार की गुंजाइश है

कुछ दिनों पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों से पराली जलाने के दुष्प्रभावों के बारे में किसानों को जागरूक करने के लिए जिलेवार शिविर लगाने को कहा था. दरअसल, योगी ने पराली में यूरिया और पानी मिलाकर किण्वन बनाने की बात कही थी. यही वजह है कि विभाग राज्य में पराली जलाने की घटनाओं को कम करने के लिए सख्त कार्रवाई कर रहा है. कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक आरके सिंह ने कहा कि हालांकि पहले के अपेक्षा स्थिति में थोड़ा सुधार हुआ है, लेकिन अभी भी सुधार की गुंजाइश है.

पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ भारी जुर्माना लगाया

अधिकारियों ने कहा कि पराली जलाने वाले किसानों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के बाद 2,500 से 15,000 रुपये के बीच जुर्माना लगाया गया है. साथ ही कृषि उपकरणों को जब्त करने सहित कड़ी कार्रवाई की गई है. इसके बाद भी फसल अवशेषों को जलाने के कई मामले सामने आए हैं. उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) द्वारा एकत्र किए गए आंकड़ों के अनुसार, इस महीने की शुरुआत तक राज्य भर से पराली जलाने की करीब 800 घटनाएं दर्ज की गई थीं. पिछले महीने ही यूपी के मुख्य सचिव डीएस मिश्रा ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में जीबी नगर (नोएडा और ग्रेटर नोएडा) और गाजियाबाद सहित 18 जिलों को एक पत्र भेजा था, जिसमें पराली जलाने की जांच करने में विफलता का जिक्र किया गया था.

यूपी पहले स्थान पर है

बता दें कि उत्तर प्रदेश कृषि अवशेष (40 मीट्रिक टन) के साथ पहले स्थान पर है. इसके बाद महाराष्ट्र (31 मीट्रिक टन) के साथ दूसरे और पंजाब (28 मीट्रिक टन) के साथ तीसरे स्थान पर है. पिछले साल ही राज्य के कृषि विभाग ने कृषि अवशेषों के निपटान के लिए एक महत्वपूर्ण उपाय के रूप में आवारा पशुओं को पराली खिलाने की वकालत की थी. वास्तव में, राज्य सरकार ने आवारा पशुओं के आश्रय गृहों में पराली के परिवहन के लिए वित्त पोषण का प्रस्ताव किया था.