धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर बैन की मांग भारत में ही नहीं इन देशों में भी उठ चुकी है

धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर बैन की मांग भारत में ही नहीं इन देशों में भी उठ चुकी है

भारत के अलावा कई दूसरे देशों में भी लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को लेकर विवाद रहा है.

जर्मनी, नीदरलैंड, फ्रांस, ब्रिटेन, बेल्जियम, सऊदी अरब जैसे देशों में धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर को लेकर सीमाएं तय हैं

भारत में लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को लेकर विवाद जारी है. महाराष्ट्र से लेकर यूपी समेत कई राज्यों में इसे लेकर विवाद खड़ा किया जा रहा है. महाराष्ट्र में MNS प्रमुख राज ठाकरे ने इस विवाद को हवा दी तो प्रदेश की उद्धव ठाकरे सरकार ने लाउडस्पीकर के इस्तेमाल के लिए पुलिस की इजाजत जरुरी कर दी. राज्य के गृहमंत्री दिलीप वलसे पाटिल ने सोमवार को कहा कि महाराष्ट्र में धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर की अनुमति देने के लिए कुछ दिनों में दिशा-निर्देश तैयार करने की संभावना है.

पाटिल ने कहा कि दिशा निर्देशों को पुलिस महानिदेशक रजनीश सेठ और मुंबई पुलिस आयुंक्त संजय पांडे की बैठक में अंतिम रूप दिया जाएगा, जिसके बाद एक अधिसूचना जारी की जाएगी. उन्होंने दोहराते हुए कहा कि सांप्रदायिक तनाव पैदा करने की कोशिश करने वाले किसी भी व्यक्ति या फिर संगठन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.

लाउडस्पीकर विवाद का शोर दूसरे देशों में भी

लाउडस्पीकर से ध्वनि प्रदूषण होता है और इसे लेकर कई प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने चिंता जाहिर की है. इससे संबंधित पहले से भी कई दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं. भारत में मौजूदा वक्त में लाउडस्पीकर विवाद तूल पकड़ चूका है, महाराष्ट्र, यूपी के कासगंज और अलीगढ़ समेत कई और शहरों में धार्मिक स्थलों पर इसे लेकर विवाद खड़ा किया जा रहा है. हालांकि भारत अकेले नहीं है जहां लाउडस्पीकर को लेकर विवाद हो रहा है और इस पर पाबंदी की मांग की जा रही है. कई दूसरे देशों में लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को लेकर दिशा-निर्देश हैं. जर्मनी, नीदरलैंड, फ्रांस, ब्रिटेन, बेल्जियम समेत कई और देशों में धार्मिक स्थानों पर लाउडस्पीकर बजाने को लेकर सीमाएं तय की गई हैं. वही नाइजीरिया में कुछ शहरों में मस्जिदों में लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर प्रतिबंध है.

इंडोनेशिया और ब्रिटेन, अमेरिका में लाउडस्पीकर को लेकर दिशा निर्देश

इंडोनेशिया में मुस्लिम आबादी काफी अधिक है लेकिन यहां भी धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर जैसे यंत्रों का अधिक इस्तेमाल से पर्यावरण को खतरा माना गया. इसके उपयोग को लेकर कई दिशा निर्देश जारी किए गए. ब्रिटेन में साल 2020 में वाल्थम फॉरेस्ट काउंसिल, लंदन ने 8 मस्जिदों को रमजान के दौरान नमाज के लिए अपनी कॉल को सार्वजनिक रूप से प्रसारित करने की अनुमति दी थी. इसके बाद लंदन शहर में कई और मस्जिदों में नमाज के लिए सार्वजनिक तौर से अपनी कॉल को प्रसारित करने की इजाजत दी थी. अमेरिका में भी धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर को लेकर विवाद रहा है. साल 2004 में अमेरिका के मिशिगन के हैमट्रैक में एक मस्जिद की ओर से अजान को प्रसारित करने के लिए लाउडस्पीकर की इजाजत मांगी थी. जिससे कई गैर मुस्लिम निवासियों को परेशानी हुई. लोगों का कहना था कि वो पहले से ही चर्च में जोर से घंटी बजाने को लेकर परेशान हैं. इसके बाद स्थानीय प्रशासन शहर में सभी धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर से शोर को लेकर नियम बनाए.

सऊदी अरब में लाउडस्पीकरों के वॉल्यूम लेवल को लेकर निर्देश

सऊदी अरब ने रमजान के दौरान मस्जिदों में लाउडस्पीकरों के वॉल्यूम लेवल पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है. इस्लामी मामलों के मंत्रालय ने कहा कि स्पीकर वॉल्यूम एक तिहाई से अधिक नहीं होना चाहिए. अधिकारियों ने मस्जिद के कर्मचारियों से यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि वे उन परिपत्रों का पालन करें जो प्रार्थना के लिए पहली (अज़ान) और दूसरी (इकामा) कॉल के लिए बाहरी लाउडस्पीकरों के उपयोग को सीमित करते हैं. पवित्र महीने के दौरान अतिरिक्त प्रार्थना के लिए लाउडस्पीकर का उपयोग नहीं किया जा सकता है.

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