नई दिल्‍ली. सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म ट्विटर को आखिरकार नया बॉस मिल ही गया. करीब छह महीने के फिल्‍मी ड्रामे के बाद दुनिया के सबसे अमीर शख्‍स एलन मस्‍क ने ट्विटर का अधिग्रहण मंजूर कर लिया और कंपनी के नए चीफ इन चार्ज बन गए हैं.

ट्विटर के लिए बोली लगाने के बाद से ही कंपनी के सीईओ पराग अग्रवाल के साथ उनकी नोक झोंक चल रही थी और अब एलन के आने पर पराग ने कंपनी छोड़ दी है. उनके साथ सीएफओ नेड सेगल की भी छुट्टी हो गई है.

ट्विटर के मुख्‍य कार्यकारी अधिकारी (CEO) पराग अग्रवाल और मुख्‍य वित्‍त अधिकारी (CFO) नेड सेगल ने भी कंपनी छोड़ दी है. दोनों ही अधिकारी सैन फ्रांसिस्‍को स्थित कंपनी के हेडक्‍वार्टर से बाहर निकल गए और लौटकर नहीं आए. इतना ही नहीं लीगल पॉलिसी, ट्रस्‍ट और सेफ्टी विभाग के हेड विजय गड्डे को भी बाहर का रास्‍ता दिखा दिया गया है.

एलन मस्‍क के पास 27 अक्‍तूबर तक 44 अरब डॉलर में ट्विटर को खरीदने या कोर्ट ट्रायल का सामना करने की डेडलाइन थी और उन्‍होंने कंपनी खरीदने का विकल्‍प अपनाया. डील पूरी होने के बाद मस्‍क ने ट्वीट किया- बर्ड फ्रीड. इसका मतलब है कि चिडि़या आजाद हुई.

अप्रैल में दिया था प्रस्‍ताव

एलन मस्‍क ने इसी साल अप्रैल में सोशल मीडिया कंपनी ट्विटर को खरीदने का प्रस्‍ताव दिया था. हालांकि, डील और उसकी कीमत पक्‍की होने के बाद एलन ने स्‍पैम अकाउंट की शिकायत करते हुए डील को रद्द करने की बात कही थी. कंपनी ने इसके खिलाफ अदालत का रुख किया, जहां आरोप-प्रत्‍यारोप की बहस के बाद आखिरकार मस्‍क ने डील को मंजूरी दे दी और बृहस्‍पतिवार को ट्विटर के हेडक्‍वार्टर पहुंच गए.

कोर्ट ने एलन मस्‍क को डील पूरी करने या ट्रायल का सामना करने का विकल्‍प दिया था. इसके बाद अक्‍तूबर में मस्‍क का मन बदला और उन्‍होंने 54.20 डॉलर प्रति शेयर के हिसाब से ट्विटर को खरीदने की मंजूरी दे दी अगर कंपनी अपना केस वापस लेती है तो. हालांकि, उस समय ट्विटर के वकील ने कहा था कि मस्‍क का यह कदम डील को लटकाने के लिए है और वे एक बार फिर गुमराह कर रहे हैं. इसके बाद कोर्ट ने कहा कि मस्‍क को 28 अक्‍तूबर तक डील पर हर हाल में फैसला करना ही होगा.

एलन मस्‍क ने बताया ट्विटर खरीदने का कारण

एलन मस्‍क ने एक संदेश में लिखा, ट्विटर खरीदने का सबसे बड़ा कारण भविष्‍य के समाज के लिए एक ऐसा मंच उपलब्‍ण्‍ध कराना है, जहां ज्‍यादा भरोसे के साथ किसी मुद्दे पर सभ्‍य तरीके से बातचीत की जा सके और इसमें हिंसा का कोई रोल न हो. यह काफी खतरनाक है कि सोशल मीडिया दो भाग में बंटा नजर आ रहा है. कोई राइट विंग की बात कर रहा तो कोई लेफ्ट विंग की. यह हमारे समाज को भी बांटने का काम करेगा.