बैड बैंक स्थापित करने का रास्ता साफ,वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण
नई दिल्ली : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज बैड बैंक को लेकर कैबिनेट में हुए कुछ फैसलो का ऐलान कर सकती है। माना जा रहा है कि बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में इस मसले पर कुछ अहम फैसले लिये गये हैं। सूत्रों के हवाले से जानकारी के अनुसार कैबिनेट ने बैड लोन के एवज में जारी की जाने वाली सिक्योरिटी रिसीट को सरकारी गारंटी देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। बैंकों के बैड लोन के बदले नेशनल एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी कुछ रकम नकद और बाकी के लिए सिक्योरिटीज रिसीट जारी करेगी। इस फैसले से बैड बैंक खुलने का रास्ता साफ हो जाएगा।
क्या होता है बैड बैंक
बैड बैंक एक असेट रीकंस्ट्रशन कंपनी की तरह काम करता है जिसका पूरा फोकस फंसे हुए कर्जों को रिकवर करने पर होता है। ये विशेष बैंक दूसरे अन्य बैंकों और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूट से उनके फंसे हुए कर्जों को खरीदता है, और इन कर्ज को रिकवर करने का काम करता है। दरअसल एनपीए की पीछे कई वजह होती हैं, कई बैड लोन थोड़ी मदद के साथ पॉजिटिव एसेट में परिवर्तित किये जा सकते हैं, तो कई लोन को रिकवर करने के लिये एसेट बिक्री की जरूरत पड़ जाती है। असेट रीकंस्ट्रक्शन कंपनियां लोन रीस्ट्रक्चर कर, छूट देकर या फिर एसेट को मॉनीटाइज कर इन फंसे कर्ज को रिकवर करती हैं या फिर फंसे कर्ज को एक बार फिर पटरी पर वापस ले आती हैं। बैड बैंक भारत की खोज नहीं है, बल्कि इसकी शुरुआत अमेरिका में हुई थी। 1980 के दशक में बहुत सारे अमेरिकी बैंकों की हालत ये थी कि वह खराब कर्ज यानी एनपीए की वजह से डूबने के कगार पर जा पहुंचे थे। ऐसे में बैड बैंक का आइडिया लाया गया और बैड असेट को गुड असेट बनाने की कोशिशें शुरू हुईं। भारत में भले ही यह नया है, लेकिन अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, स्पेन, पुर्तगाल जैसे देशों में सालों से बैड बैंक काम कर रहे हैं।
क्या होगा फायदा
आम तौर पर बैंक कर्ज बांटने और और उससे हुई ब्याज आय का इस्तेमाल अपने ऑपरेशंस और जमा पर ब्याज बांटने के लिये करते हैं इससे ही बैंक का मुनाफा या घाटा तय होता है। हालांकि एनपीए या फंसे हुए कर्ज इस फ्लो पर नकारात्मक असर डालते है, और इसका बैंक की आर्थिक स्थिति पर सीधा असर पड़ता है। बैंक इस स्थिति से बचने के लिये प्रोविजनिंग करते हैं, जिससे फंसे हुए कर्ज का ऑपरेशंस और जमाकर्ताओं पर असर न पड़े। हालांकि इस कदम से बैंक की बैलेंसशीट पर दबाव दिखने लगता है, इसके साथ ही फंसे हुए कर्ज को लेकर अतिरिक्त उपायों से बैंक के रिसोर्स भी खर्च होने लगते हैं। कमजोर बैलेंसशीट निवेशकों के लिये भी नकारात्मक संकेत होती है। हालांकि बैड बैंक बनने से आम बैंक एनपीए का बोझ बैड बैंक को ट्रांसफर कर इसके असर से बाहर हो सकेंगे और अपने मुख्य कारोबार पर ध्यान दे सकेंगे। वहीं बैलेंस शीट बेहतर होने से निवेशकों का रुख भी सकारात्मक होगा और बैड बैंक की मौजूदगी से बैंक और तेजी के साथ कर्ज बांटने के लिये प्रोत्साहित होंगे।

