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15 फीसदी पहुंची बेरोजगारी दर ने बढ़ाई सरकार की मुश्किल

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फिक्की ने अपनी एक रिसर्च के माध्यम से दावा किया है कि कोरोना की दूसरी लहर के कारण व्यापारियों के 'व्यापार विश्वास सूचकांक' में बहुत गिरावट आई है। व्यापारियों और आद्योगिक कंपनियों को लग रहा है कि इस बार बाजार में कमजोर मांग की स्थिति लंबे समय तक नहीं सुधरेगी और इस कारण नजदीकी समय में व्यापार में तेजी नहीं आएगी। कोरोना की पहली लहर के बाद लोगों ने अपनी पिछली बचत का उपयोग कर लिया था, जिसके कारण बाजार में मांग बढ़ गई थी और अर्थव्यवस्था पटरी पर आ गई थी।

लेकिन कोरोना की इस लहर में लोगों के पास पिछली बचत नहीं है, जिसके कारण लोग खर्च नहीं बढ़ा सकेंगे और इस कारण बाजार में मांग भी नहीं बढ़ सकेगी। अगर लोगों के हाथ में पैसा पहुंचता रहता तो मांग बढ़ाने में मदद मिल सकती थी, लेकिन 15 फीसदी तक पहुंच चुकी बेरोजगारी दर ने स्थिति को और अधिक संकटपूर्ण बना दिया है।

ताजा रिसर्च में देश में 'व्यापार विश्वास सूचकांक' 51.5 अंक तक गिर गया है, जबकि इसके पहले के चरण में यह 74.2 अंक आंका गया था। यानी व्यापारियों के बाजार के प्रति विश्वास में 23 अंक तक की भारी गिरावट आई है। अर्थव्यवस्था के लिहाज से इसे बेहतर नहीं माना जा रहा है।