इन राज्यों में छा सकता है 'अंधेरा', देश में कोयले की कमी से 'ब्लैकआउट' का खतरा गहराया

 इन राज्यों में छा सकता है 'अंधेरा', देश में कोयले की कमी से 'ब्लैकआउट' का खतरा गहराया

कोयले की मांग बढ़ने की वजह से देश के कई राज्यों में ‘ब्लैकआउट’ का खतरा मंडराने लगा है. कोयले की कमी और अर्थव्यवस्था में तेजी से बिजली संकट करोड़ों लोगों को अंधेरे में डाल सकता है. इस बीच बिजली की एकाएक बढ़ी डिमांड और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतों में भी वृद्धि भी इसका एक कारण है. इसके कारण भारत जो दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कोयला का आयातक, उत्पादक और उपभोक्ता है, वो ‘ब्लैकआउट’ का सामना कर सकता है.

देश में बिजली की आपूर्ति करने वाले कोयला आधारित कई बिजली संयंत्रों के पास 20 दिन के मुकाबले सिर्फ एक-दो दिन के लिए ही उत्पादन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कोयला बचा है. बता दें कि केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के दिशानिर्देश के मुताबिक जो संयंत्र कोयला खदान से एक हजार किलोमीटर से अधिक दूरी पर स्थित हैं उनके पास कम से कम 30 दिन का कोयला भंडार होना चाहिए.

ये है कोयले की भारी कमी का सामना कर रहे राज्यों की लिस्ट, जहां ब्लैकआउट का खतरा मंडरा रहा है…

दिल्ली

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘बिजली संकट’ को लेकर एक पत्र लिखा. केजरीवाल ने एक ट्वीट में कहा, ‘मैं व्यक्तिगत रूप से स्थिति पर कड़ी नजर रख रहा हूं. हम इससे बचने की पूरी कोशिश कर रहे हैं.’ उन्होंने राजधानी में बिजली की आपूर्ति करने वाले उत्पादन संयंत्रों में कोयला और गैस पहुंचाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हस्तक्षेप करने का आग्रह किया.

दिल्ली के बिजली मंत्री ने कहा कि अगर आने वाले दिनों में एनटीपीसी लिमिटेड की ओर से बिजली की आपूर्ति नहीं की गई तो राष्ट्रीय राजधानी में ‘ब्लैकआउट’ हो सकता है. इस बीच, टाटा पावर के प्रवक्ता ने कहा कि उन्होंने मुंद्रा में उत्पादन बंद कर दिया है क्योंकि आयातित (इंपोर्ट होकर आने वाले कोयले) कोयले की कीमत बढ़ गई है.

राजस्थान

राजस्थान में आए दिन बिजली गुल रहती है. राज्य सरकार ने घोषणा की है कि वह बिजली संकट से निपटने के लिए दैनिक आधार पर एक घंटे की निर्धारित बिजली कटौती का सहारा ले रही है. राज्य में कोयले की कमी के कारण कुछ ताप विद्युत इकाइयां बंद हैं. जबकि बाकी इकाइयों में कोयला खदानों में बारिश के पानी के कारण आपूर्ति कम होने के कारण एक या दो दिनों के लिए कोयले का भंडार बचा हुआ है. राजस्थान में प्रतिदिन औसत मांग 12,500 मेगावाट की है, जबकि औसत उपलब्धता 8,500 मेगावाट ही है. राज्य में प्रतिदिन करीब 11 रैक कोयले की आवश्यकता के मुकाबले अभी 7.50 रैक कोयला ही मिल पा रहा है.

पंजाब

पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने कोयले की कथित अपर्याप्त आपूर्ति को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा और आशंका जताई कि आने वाले कुछ दिनों में कोयले की आपूर्ति तेजी से कम होने की वजह से राज्य के ताप बिजली संयंत्रों को बंद करना पड़ा सकता है. पंजाब में तलवंडी साबो पावर प्लांट और रोपड़ प्लांट में दो-दो यूनिट और लहर मोहब्बत में एक यूनिट, 475 मेगावाट का एक प्लांट बंद हो गया है. राज्य में कई स्थानों पर दो-तीन घंटे तक बिजली कटौती की खबरें हैं. वर्तमान में राज्य में बिजली की मांग लगभग 9,000 मेगावॉट है और राज्य में बिजली संयंत्रों के पास अब 4 दिन तक का कोयला भंडार बचा है.

तमिलनाडु

तमिलनाडु जनरेशन एंड डिस्ट्रीब्यूशन कॉरपोरेशन (टैंगेडको) ने कहा कि उसने शहर में रखरखाव के काम के लिए चेन्नई के कुछ हिस्सों में बिजली की सप्लाई को निलंबित कर दिया है. राज्य के पास केवल 2 दिनों का भंडार है और तब तक कोयले की आपूर्ति नहीं हुई तो लोगों को बिजली का संकट का सामना करना पड़ सकता है. ताप ऊर्जा केंद्रों पर कोयले के भंडार में गिरावट आई है क्योंकि कोयले के केंद्रीय आवंटन में 20,000 टन प्रतिदिन की कमी की गई है.

ओडिशा

ओडिशा में उद्योग, कोयले की कमी का सामना कर रहा है और उसने राज्य सरकार से ईंधन की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने की बात कही है. उद्योग संगठन उत्कल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री लिमिटेड (यूसीसीआई) ने ओडिशा सरकार से राज्य स्थित उद्योगों को कोयले की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने का आग्रह किया है.

राज्य में कोयला भंडार देश के जमा भंडार का लगभग 25 प्रतिशत है, और कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) की सहायक कंपनी महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (एमसीएल) 15 करोड़ टन कोयले का उत्पादन करती है. ओडिशा स्थित बिजली संयंत्रों (16,000 मेगावॉट) को प्रतिवर्ष 9-9.5 करोड़ टन कोयले की आवश्यकता होती है, जो कि लागत दक्ष टिकाऊ उद्योग संचालन के लिए ओडिशा के कोयला उत्पादन का 60 प्रतिशत हिस्सा है.

आंध्र प्रदेश

आंध्र प्रदेश में भी, कोयले की कमी से राज्य अनिर्धारित बिजली कटौती की ओर बढ़ रहा है. आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने प्रधानमंत्री को लिखे एक पत्र में कहा, ‘फसल की कटाई के अंतिम चरण में अधिक पानी की आवश्यकता होती है और अगर इससे इनकार किया जाता है, तो खेत सूख सकते हैं और किसानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है.’ रेड्डी ने पीएम मोदी को लिखे पत्र में कहा, ‘आंध्र प्रदेश में, पिछले छह महीनों में बिजली की मांग में 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और पिछले एक महीने में 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. इसके साथ कोयले की कमी देश के ऊर्जा क्षेत्र को संकट में डाल रही है.’

इस बीच, पड़ोसी तेलंगाना जेनको अधिकारियों ने दावा किया कि उनके पास अगले एक सप्ताह से 10 दिनों के लिए पर्याप्त कोयला भंडार है. वहीं, कोयले की कमी के कारण बिहार, झारखंड और ओडिशा भी ऊर्जा की गंभीर कमी का सामना कर रहे हैं.

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