रेलवे को हुआ 26 हजार 338 करोड रुपए का घाटा, CAG रिपोर्ट में रेलवे के मुनाफे के दावे की खुली पोल

रेलवे को हुआ 26 हजार 338 करोड रुपए का घाटा, CAG रिपोर्ट में रेलवे के मुनाफे के दावे की खुली पोल

नई दिल्ली: महालेखापरीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में रेलवे के मुनाफे के दावों की पोल खुल गई है। कैंग रिपोर्ट के मुताबिक रेलवे को पिछले एक साल में 26 हजार 338 करोड़ रुपये का घाटा हुआ। बताया जा रहा है कि रेलवे को इतिहास में इतना बड़ा घाटा पहली बार हुआ है। रेल मंत्रालय के मुताबिक रेलवे ने 1589 करोड़ रुपये का नेट सरप्लस दिखाया गया था, जोकि सीएजी की रिपोर्ट का अनुसार गलत साबित हुआ है। सीएजी ने 21 दिसंबर को रेलवे के समक्ष फाइनेंस रिपोर्ट पेश की थी।

साल 2019-20 में रेलवे का ऑपरेटिंग रेशियो 114.35 फीसदी था। यानी 100 रुपये कमाने में रेलवे 114.35 रुपये खर्च कर रहा था, लेकिन रेलवे की अकाउंटेंसी का दावा है कि उक्त वर्ष ऑपरेटिंग रेशियो 98.36 फीसदी रहा। कैग ने संसद में मंगलवार को रेलवे वित्त प्रतिवेदन में तीन अध्याय पेश किए हैं। पहले अध्याय में रेलवे की वित्तीय स्थिति के बारे में रेलवे ने दावा किया कि 2019-20 में विभाग के पास नेट सरप्लस 1589.42 करोड़ रुपये था। जबकि हकीकत यह है कि इस वित्तीय वर्ष में रेलवे 26,326.39 करोड़ के निगेटिव बैलेंस से जूझ रही थी। 

कैग की रिपोर्ट में यह साफ कहा गया है कि रेलवे का परिचालन अनुपात 2018-19 में 97.29 फीसदी था जो 2019-20 में बढ़कर 98.36 फीसदी हो गया। लेकिन अगर पेंशन भुगतान पर वास्तविक खर्च को ध्यान में रखा जाए तो रेलवे का परिचालन अनुपात 2019-20 में 98.36 फीसदी के बजाय 114.35 फीसदी होता है। कैग ने रेलवे के दावों को नकारते हुए कहा कि इस तरह रेलवे की तरफ से दर्शाया गया 98.36 फीसदी परिचालन अनुपात उसके वास्तविक परिचालन अनुपात को नहीं दिखाता है।

इसके अतिरिक्त प्राप्त जानकारी के मुताबिक रेलवे की ओर से सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन और अन्य जोनल रेलवे व्यय की बजाय केवल पेंशन को दर्शाया गया है। और यदि रेलवे पेंशन और अन्य व्यय को दर्शाया जाता है तो रेलवे की बैलेंस शीट में ऐतिहासिक रूप से पहली बार करीब 26,326 करोड रुपए का घाटा दर्ज किया गया है

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