सीएम बघेल ने राम वन गमन पर्यटन परिपथ का किया शुभारंभ, छत्तीसगढ़ के जनमन में रचे बसे हैं राम

सीएम बघेल ने राम वन गमन पर्यटन परिपथ का किया शुभारंभ, छत्तीसगढ़ के जनमन में रचे बसे हैं राम

रायपुरः छत्तीसगढ़ में राम वन पथ गमन मार्ग शुरु हो गया है. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इसकी शुरूआत की. उन्होंने कहा कि भगवान राम जिस वन पथ पर चलकर मर्यादा पुरूषोत्तम कहलाए आज छत्तीसगढ़ में वह वन पथ देश-दुनिया के लिए खुल गया है. सीएम बघेल ने कहा कि मां कौशल्या की नगरी चंदखुरी में राम वन गमन पर्यटन परिपथ परियोजना के प्रथम चरण का लोकार्पण किया. इस अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय भव्य समारोह का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि भगवान श्री राम का छत्तीसगढ़ से बड़ा गहरा नाता है. भगवान श्री राम हम छत्तीसगढ़ियों के जीवन और मन में रचे बसे हैं. सोते-जागते, एक-दूसरे का अभिवादन करते, सुख हो अथवा दुख हर पल हम छत्तीसगढ़िया लोग भगवान श्री राम का सुमिरन करते हैं. 

चंदखुरी भगवान राम का ननिहाल है 
सीएम बघेल ने कहा कि हम छत्तीसगढ़िया लोग, भगवान श्री राम को माता कौशल्या के राम, भांचा राम, वनवासी राम, शबरी के स्नेही और दयालु राम के रूप में जानते और मानते हैं. कार्यक्रम की अध्यक्षता लोक निर्माण, गृह एवं पर्यटन मंत्री श्री ताम्रध्वज साहू ने की. उन्होंने कहा कि भगवान श्री राम का छत्तीसगढ़ के जन जीवन, लोक संस्कृति, लोक गीत में गहरा प्रभाव देखने और सुनने को मिलता है. भगवान श्री राम ने अपने वनवास की 14 साल की अवधि में से लगभग 10 साल की अवधि छत्तीसगढ़ में व्यतीत की. माता कौशल्या से मिले संस्कार और छत्तीसगढ़ में ग्रामीणों, वनवासियों और किसानों के साथ बिताई अवधि ने उनके व्यक्तित्व को इतनी ऊंचाई दी कि भगवान श्री राम मर्यादा पुरूषोत्तम कहलाए. मुख्यमंत्री ने इस मौके पर माता कौशल्या की नगरी चंदखुरी को प्रणाम करते हुए सभी लोगों को नवरात्रि पर्व की बधाई दी. उन्होंने कहा कि आज यहां का वातावरण ऐसा लग रहा है जैसे माता कौशल्या भगवान राम को लेकर मायके चंदखुरी आई है, पूरा दृश्य मनोरम हो गया है. चंदखुरी ही नहीं पूरा छत्तीसगढ़ भगवान श्री राम का ननिहाल है. उन्होंने कहा कि भगवान श्री राम का यह प्रताप है कि छत्तीसगढ़िया लोग भांचा को राम के रूप में मानते हैं और उन्हें प्रणाम करते हैं. 

2260 किलोमीटर का राम वन गमन पर्यटन परिपथ विकसित
सीएम भूपेश बघेल ने राम वन गमन पर्यटन परिपथ के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी और कहा कि कोरिया जिले के सीतामढ़ी में हरचौका से लेकर सुकमा के रामाराम तक लगभग 2260 किलोमीटर का राम वन गमन पर्यटन परिपथ विकसित किया जा रहा है. छत्तीसगढ़ की  संस्कृति हमारी पहचान है. इसको आगे बढ़ाना है, उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार हर वर्ग, हर समाज के लोगों की आस्था के केन्द्रों को संरक्षित एवं संवर्धित कर रही है. इसके अलावा सिरपुर स्थित पुरातात्विक बौद्ध स्थल से लेकर बस्तर अंचल में आदिवासियों की संस्कृति एवं परंपरा से जुडे़ घोटुल और देवगुड़ियों के विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी. 

सीएम ने कहा कि छत्तीसगढ़ अब संस्कृति के गढ़ के रूप में अपनी पहचान बना रहा है. छत्तीसगढ़ की संस्कृति यहां की परंपरा, यहां के धार्मिक, पुरातात्विक महत्व के स्थल, पर्यटन स्थल, सरगुजा के रामगढ़ स्थित पांच हजार वर्ष पूर्व की प्राचीन नाट्यशाला को विश्व पटल पर लाने का काम हमारी सरकार कर रही है. मुख्यमंत्री ने मां बम्लेश्वरी की नगरी डोंगरगढ़ का उल्लेख करते हुए कहा कि हम धार्मिक एवं पुरातात्विक महत्व के स्थलों को सुन्दर बनाने का काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में राम राज और महात्मा गांधी के सपनों को साकार करना है. यहां सुख-शांति बनाए रखना है. उन्होंने कहा कि कुछ लोग रंग में भंग डालने की कोशिश कर रहे हैं. वह कभी सफल नहीं होंगे. यह धरती भगवान श्री राम का ननिहाल और संतों की है. सहनशीलता और प्रेम की धरती है.

इस दौरान गृह एवं पर्यटन मंत्री ताम्रध्वज साहू ने कहा कि छत्तीसगढ़ में भगवान श्री राम के वन गमन के स्मृति को संजोने के लिए राम वन गमन पर्यटन परिपथ के विकास एवं निर्माण के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पूरे देश के राम और रामायण से जुड़े लोगों की ओर से बधाई दी. उन्होंने कहा कि कोरोना काल के बावजूद भी छत्तीसगढ़ में जनसुविधा के रिकॉर्ड काम हुए हैं, राम वन गमन पर्यटन परिपथ का काम भी लगातार जारी रहा है. आज चंदखुरी स्थित माता कौशल्या मंदिर के जीर्णाोंद्धार एवं परिसर के सौंदर्यीकरण के कार्य का लोकार्पण किया गया है. 

भगवान श्री राम की 51 फीट ऊंची प्रतिमा का अनावरण
चंदखुरी के प्राचीन माता कौशल्या मंदिर पहुंचकर मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने विधिविधान से पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की खुशहाली और समृद्धि की कामना की. मुख्यमंत्री ने इस मौके पर भगवान श्री राम की 51 फीट ऊंची प्रतिमा का लाईट के माध्यम से अनावरण किया. गौरतलब है कि कौशल्या माता मंदिर का जीर्णाोंद्धार  एवं परिसर के सौंदर्यीकरण का कार्य 15 करोड़ 45 लाख रुपए की लागत से किया जा रहा है. वैश्विक पर्यटन के दृष्टिकोण से विकसित किए जा रहे मंदिर परिसर में 51 फीट ऊंची श्रीराम प्रतिमा स्थापित की गई है. साथ परिसर में भव्य गेट, मंदिर के चारों ओर तालाब का सौंदर्यीकरण, आकर्षक पथ निर्माण, वृक्षारोपण किया गया है. मंदिर चारों ओर से मनमोहक उद्यानों से घिरा है, तालाब के मध्य में शेषनाग शैय्या पर शयन मुद्रा में भगवान विष्णु के चरण दबाते मां लक्ष्मी की आकर्षक प्रतिमा है, दूसरी ओर समुद्र मंथन के दृश्य को प्रतिबिंबित करती हुई देव-दानवों की मूर्तियां श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र हैं. 

पग-पग पर होंगे भगवान श्रीराम के दर्शन
छत्तीसगढ़ में भगवान श्रीराम के वनवास काल से जुड़े स्थलों को विश्व स्तरीय पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए प्रारंभ की गई राम वन गमन पर्यटन परिपथ परियोजना का मुख्यमंत्री ने आधिकारिक तौर पर शुभारंभ किया. छत्तीसगढ़ भगवान श्रीराम के ननिहाल के रूप में सम्पूर्ण विश्व में अपनी अलग पहचान रखता है. इस पर्यटन परिपथ के कोरिया जिले से सुकमा तक कदम-कदम पर भगवान श्रीराम के दर्शन होंगे और उनसे जुड़ी महत्व की कथाएं देखने और सुनने को मिलेंगी. राम वन गमन पर्यटन परिपथ परियोजना में सीतामढ़ी हरचौका (कोरिया), रामगढ़ (सरगुजा), शिवरीनारायण (जांजगीर-चांपा), तुरतुरिया (बलौदाबाजार), चंदखुरी (रायपुर), राजिम (गरियाबंद), सिहावा सप्तऋषि आश्रम (धमतरी), जगदलपुर (बस्तर) और रामाराम (सुकमा) का 133 करोड़ 55 लाख रुपए की लागत से पर्यटन की दृष्टि से विकास का कार्य किया जा रहा है. इस पर्यटन परिपथ के माध्यम से राज्य में न केवल ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि पर्यटन के नए वैश्विक अवसर बढ़ेंगे.

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