केंद्रीय गृह मंत्री ने नक्सल प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाई थी, CM भूपेश बघेल नहीं हुए शामिल 

केंद्रीय गृह मंत्री ने नक्सल प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाई थी, CM भूपेश बघेल नहीं हुए शामिल

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को नक्सल प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की। इस दौरान केंद्र और राज्य सरकारों की रणनीति की समीक्षा के साथ भावी योजनाओं पर भी चर्चा हुई। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल इस बैठक की जगह महासमुंद में आयोजित चंद्रनाहू कुर्मी क्षत्रिय समाज के महाधिवेशन में पहुंचे। उन्होंने कहा कि समाज का कार्यक्रम पहले से तय था। इसलिए टालना उचित नहीं समझा।

बघेल ने कहा कि इसको राजनीतिक चश्मे से देखना ठीक नहीं है। समाज का कार्यक्रम बहुत पहले तय हुआ था। गृहमंत्री के साथ बैठक का कार्यक्रम बाद में आया। हमारे मुख्य सचिव और डीजीपी दोनों उस बैठक में शामिल हुए हैं। नक्सलवाद के मुद्दे पर वैसे भी केंद्रीय गृह मंत्री से बात होती रहती है।

उन्होंने कहा कि भाजपा के शासनकाल में जितने इलाकों में नक्सली थे, उसमें से अधिकांश को हमने खाली करा लिया है। वहां विकास के काम हो रहे हैं। हम लोगों का विश्वास जीत रहे हैं। धुर नक्सली क्षेत्र कहे जाने वाले जगरगुण्डा, तर्रेम और सिलगेर के हमारे कैंपों में स्थानीय लोग आ रहे हैं। स्थानीय लोग वहां राशन कार्ड, आधार कार्ड, जॉब कार्ड और हेल्थ कार्ड बनवा रहे हैं। स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र खोला जा रहा है। जो इलाके नक्सलियों से खाली हो गए हैं, वहां विकास और रोजगार का काम किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि छत्तीसगढ़ में नक्सली अब सिमट गए हैं।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बैठक में शामिल नहीं होने पर भाजपा ने मोर्चा खोल दिया है। रायपुर सांसद सुनील सोनी ने कहा कि एक तरफ मुख्यमंत्री चिटि्ठयां लिख लिखकर नक्सली समस्या को लेकर केंद्र सरकार के सामने रोना रोते हैं। जब आमने-सामने की चर्चा का अवसर आया तो मुख्यमंत्री बैठक में शामिल ही नहीं हुए। यह तब है जब नक्सल प्रभावित सभी राज्यों के मुख्यमंत्री वहां मौजूद रहे। भाजपा सांसद ने कहा कि कहीं यह किनारा करने की कोशिश तो नहीं है।

बैठक के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि नक्सल प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों व वरिष्ठ अधिकारियों के साथ वामपंथी उग्रवाद पर समीक्षा बैठक की। इसमें इस समस्या के स्थायी समाधान हेतु केंद्र व राज्यों के बीच और बेहतर समन्वय पर बल दिया। जब तक हम इस समस्या से पूरी तरह निजात नहीं पाते तब तक देश का और वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित राज्यों का पूर्ण विकास संभव नहीं है। इस बैठक में मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, झारखंड और बिहार के मुख्यमंत्री और अफसर शामिल हुए थे।

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