संवाददाता अंकित कुमार 

उत्तर-प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी की चुनौतियां बढ़ गई हैं. सूबे की योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य बीजेपी (BJP) का साथ छोड़ समाजवादी पार्टी (SP) में शामिल हो गए हैं.

मौर्य के इस्तीफे के बाद अब मंगलवार को बीजेपी के तीन और विधायकों ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया. इस पर एनसीपी चीफ शरद पवार ने कहा है कि मौर्य का इस्तीफा अभी शुरुआत है. आगे और भी बहुत कुछ होगा. आने वाले दिनों में आप देखेंगे कि ऐसे और भी चेहरे बीजेपी को झकझोरेंगे. पवार का दावा है कि और 13 विधायक उनके साथ सपा में शामिल होंगे.

स्वामी प्रसाद मौर्य के समर्थन में बांदा जिले की तिंदवारी विधानसभा से विधायक ब्रजेश प्रजापति, शाहजहांपुर की तिलहर सीट से विधायक रोशनलाल वर्मा और कानपुर के बिल्हौर से विधायक भगवती सागर ने बीजेपी छोड़ी है. खबरों के मुताबिक, मौर्य के साथ उनके समर्थक भी समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे.

3 बार के विधायक हैं वर्मा, जितिन  प्रसाद को हरा चुके

विधायक रोशन लाल ने बीजेपी छोड़ते वक्त कहा कि योगी सरकार में उनकी 5 सालों तक की गई शिकायतों पर कोई सुनवाई नहीं हुई, जिसके चलते उन्हें यह निर्णय लेना पड़ा. शाहजहांपुर की तिलहर सीट से विधायक रोशनलाल वर्मा तीन बार के विधायक हैं. 2007 और 2012 में बहुजन समाज पार्टी के टिकट से चुनाव जीतकर सदन में पहुंचे वर्मा ने साल 2017 में बीजेपी का दामन थाम लिया था और वह तीसरी बार फिर चुनाव जीते. बता दें कि वर्मा ने इस सीट से कांग्रेस के तत्कालीन नेता जतिन प्रसाद को 5705 वोटों से चुनाव हराया था. हालांकि, अब जतिन प्रसाद बीजेपी के पाले में जा चुके हैं और योगी सरकार में मंत्री हैं.

उधर, अब विधायक रोशनलाल वर्मा ने समाजवादी पार्टी की सदस्यता ले ली है. माना जा रहा है कि बीजेपी छोड़कर आने वाला यह नेता 2022 का चुनाव सपा के टिकट पर लड़ेगा. 58 साल के रोशनलाल वर्मा ने शाहजहांपुर जनपद के आदर्श स्कूल से आठवीं तक पढ़ाई की है. वर्मा के 3 बेटे और पांच बेटियां हैं.

31166 मतों से जीते थे

मौर्य के खेमे में शामिल भगवती प्रसाद सागर उत्तर प्रदेश की योगी सरकार में श्रम मामलों के मंत्रालय में बतौर राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) भूमिका निभा रहे थे. वह कानपुर नगर जिले के बिल्हौर निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं. 2017 के चुनाव में भगवती सागर ने बीएसपी के उम्मीदवार कमलेश चंद्र दिवाकर को 31166 मतों से पराजित किया था. इस चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार भगवती को 102326 और बीएसपी के कमलेश को 71160 वोट मिले थे.

बसपा से निष्काषित भी हो चुके सागर

कानपुर देहात के गोपलपुर में 28 मई 1955 को जन्मे भगवती प्रसाद सागर ने बीए और एलएलबी की तालीम हासिल की है. 1996 में बसपा के टिकट पर बिलहौर विधानसभा से चुनाव जीतकर सागर ने अपने राजनीति करियर का आगाज किया था. 2007 में भगवती प्रसाद सागर को बसपा ने झांसी के मऊरानीपुर विधानसभा से चुनावी मैदार में उतारा था. सूबे की बसपा सरकार में वह सेवायोजन राज्यमंत्री रह चुके हैं. हालांकि, पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त रहने के आरोप में साल 2012 में बसपा ने सागर को निष्कासित भी कर दिया था. साल 2017 में सागर ने स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ बीजेपी का दामन थाम लिया था और चुनाव में फतह हासिल करके विधानसभा पहुंचे थे.

योगी सरकार को घेरते रहे प्रजापति

बांदा जिले की तिंदवारी विधानसभा सीट पर 2017 में के चुनावों में बृजेश कुमार प्रजापति ने बहुजन समाज पार्टी के जगदीश प्रसाद को 37,407 वोटों के भारी अंतर से हराया था. इस चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार प्रजापति को 82197 वोट मिले थे. मूल रूप से बांदा जनपद के जरी गांव में जन्मे ब्रजेश प्रजापति की शुरुआती शिक्षा जनपद मुख्यालय से ही पूरी हुई थी, इसके साथ ही उन्होंने ग्रेजुएशन करने के साथ एलएलबी की डिग्री भी ली है.

प्रजापति ने बुंदेलखंड में रेत खनन को लेकर लगातार अपनी ही योगी सरकार को घेरा था. इससे पहले वह बसपा सरकार में राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य भी रहे थे. पुराने बसपाई प्रजापति स्वामी प्रसाद मौर्य के नजदीकी माने जाते हैं. 2017 के चुनाव में मौर्य के साथ ही उन्होंने बीजेपी का झंडा उठाया था.